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Ram Navami Message 2025


On the sacred occasion of Ram Navami, we gather not merely for festivity but for deep introspection and spiritual contemplation. Lord Rama, revered as Maryada Purushottama, symbolizes truth, sacrifice, compassion, and righteousness. His divine life continues to guide us toward ethical living and universal harmony. In today’s world, where values often waver amidst change and chaos, Rama’s virtues shine as a beacon to those walking the path of dharma.


Although the exact birth-date of Shri Sainath remains unknown, the Shirdi tradition commemorates Ramanavami (the ninth day of the bright half of the Chaitra month in the Hindu calendar, typically falling in March-April) as Baba's birthday. This celebration is symbolic, as Shri Ram embodied moral excellence, while Ravan represented moral decay. No other species has demonstrated such extremes, prompting the notion that "God created humans in His image.


Shirdi Sai Baba, whose birth we lovingly commemorate today, taught us through his simple yet profound actions such as embracing all without distinction, planting trees and caring for the environment. He emphasized the importance of inner purity over outward rituals, urging us to cultivate virtues like love, empathy, and tolerance.


In an ever-changing world marked by rapid technological advancements and environmental shifts, the essence of Lord Rama's and Sai Baba's teachings remain timelessly relevant. They beckon us to turn inward, to reflect deeply, and to strive earnestly toward self-realization and spiritual growth.

The term "Navami" refers to the ninth lunar day, a significant point in the cosmic calendar. However, when interpreted as "Navadha," it reveals a profound spiritual significance. "Navadha Bhakti" becomes the key to unlocking excellence within us, synonymous with spiritual growth. This nine-fold devotional approach to the Divine or Sadguru encompasses practices such as worship, remembrance, meditation, and more.

May Lord Rama and Shri Sai Baba bless us with strength to uphold righteousness, compassion to serve all, and wisdom to seek the divine within. Let us dedicate ourselves anew today to nurturing our inner spiritual landscape. May our devotion inspire kindness towards all beings, responsible stewardship of our environment, and unwavering commitment to truth and virtue.

 

May Shri Sai bless us all.

Dr C. B. Satpathy


 

रामनवमी संदेश २०२५

राम नवमी के पावन अवसर पर हम केवल उत्सव मनाने के लिए ही नहीं, बल्कि गहन अंतनिर्रीक्षण और आध्यात्मिक चिंतन के लिए भी एकत्रित होते हैं। मर्यादा पुरुषोत्तम के रूप में पूजे जाने वाले भगवान राम सत्य, त्याग, करुणा और सदाचार के प्रतीक हैं। उनका दिव्य जीवन हमारे नैतिक जीवन और विश्वव्यापी सद्भाव की दिशा में निरंतर हमारा मार्गदर्शन करता रहता है। आज की दुनिया में, जहाँ परिवर्तन और अराजकता के बीच मूल्य प्रायः डगमगाते रहते हैं, धर्म के पथ पर चलने वालों के लिए राम के गुण प्रकाशस्तंभ स्वरूप हैं।


हालाँकि श्री साईंनाथ की सही जन्मतिथि अज्ञात है, किंतु शिरडी-परंपरा में रामनवमी (हिंदू कैलेंडर में चैत्र महीने के शुक्ल पक्ष की नवमी तिथि, जो सामान्यतः मार्च-अप्रैल में पड़ती है) को बाबा के जन्मदिन के रूप में मनाई जाती है। यह उत्सव प्रतीकात्मक है, क्योंकि श्री राम नैतिक उत्कृष्टता के प्रतीक थे, जबकि रावण नैतिक पतन का प्रतिनिधित्व करता था। किसी भी अन्य प्रजाति ने ऐसी चरम सीमाओं को नहीं दर्शाया है, जिससे यह धारणा बनी है कि ‘‘भगवान ने मनुष्यों की रचना अपनी छवि में की है।


शिरडी साईं बाबा, जिनके जन्म को हम आज प्रेमपूर्वक स्मरण करते हैं, ने हमें अपने सरल लेकिन गहन कार्यों जैसे बिना किसी भेदभाव के सभी को अपनाना, पेड़ लगाना और पर्यावरण की देखभाल करना सिखाया। उन्होंने बाह्य विधि -विधानों की अपेक्षा आंतरिक शुद्धता को महत्व दिया, और हमें प्रेम, समानुभूति और सहिष्णुता जैसे गुणों को विकसित करने की प्रेरणा दी।


इस निरंतर परिवर्तित होती हुई दुनिया में, जहाँ तेजी से तकनीकी प्रगति और पर्यावरणीय बदलाव हो रहे हैं, भगवान राम और साईं बाबा की शिक्षाओं का सार कालातीत रूप से प्रासंगिक बना हुआ है। वे हमें अंतर्मुखी होने, गहन चिंतन करने और आत्म-साक्षात्कार एवं आध्यात्मिक विकास की दिशा में गंभीरतापूर्वक प्रयास करने के लिए प्रेरित करते हैं।


‘नवमी‘ शब्द चंद्रमास की नवमी तिथि को दर्शाता है , जो ब्रह्मांडीय कैलेंडर में एक महत्वपूर्ण बिंदु है। हालाँकि, जब ‘नवधा‘ के रूप में व्याख्या की जाती है, तो यह एक गहन आध्यात्मिक महत्व का रहस्योद्घाटन करता है। ‘नवधा भक्ति‘ हमारे भीतर उत्कृष्टता को खोलने की कुंजी बन जाती है, जो कि आध्यात्मिक विकास का पर्याय है। ईश्वर या सद्गुरु के प्रति इस नवधा भक्ति -भाव में पूजन, स्मरण, ध्यान आदि सम्मिलित हैं।


भगवान राम और श्री साईं बाबा हमें सदाचार को बनाए रखने की शक्ति, सभी की सेवा करने के लिए करुणा और अपने ईश्वरीय स्वरूप की खोज करने के लिए ज्ञान प्रदान करें। आइए, आज हम अपने आंतरिक आध्यात्मिक परिदृश्य को पोषित करने के लिए स्वयं को नए सिरे से समर्पित करें। हमारी भक्ति सभी प्राणियों के प्रति दया, हमारे पर्यावरण के प्रति उत्तरदायित्व और सत्य एवं सदाचार के प्रति अटूट प्रतिबद्धता को प्रेरित करे।


श्री साईं हम सभी पर कृपा करें ।

डॉ. सी.बी. सतपथी


 
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